मेरे हाथो मै एक दिन हल्दी लगी थी,
मेरे माथे भी सिन्दूर सजा था,
मै भी सपने ले आँखों मै बेठी थी,
पर बन कर कजरा प्यार बह गया
हर एक नजर, ताने थी देती
क्यूकी मै थी बेटी एक गरीब की
कागज पर ढल आई है मेरे अक्स की स्याही, कुछ और नहीं मैं बस एक रचना ही तो हूँ if u want to see the poems of my blog, please click at the link of old posts at the end of the each page
Wednesday, May 9
उम्मीद
एक अहसास था मै चलती रही,
वो दूर था मै चलती रही
अब पा लिया ह जो उसको
तो ओर कुछ पाने की
उम्मीद बाकी ना रही
वो दूर था मै चलती रही
अब पा लिया ह जो उसको
तो ओर कुछ पाने की
उम्मीद बाकी ना रही
Tuesday, May 8
मंजिल की थकान
वो थकी सी थी, हाथ चलने को मन कर रहे थे
पर आँखों मे एक अनोखी चमक थी
वो जिस मंजिल को पाने के लिए , वो दीन रात दोडा करती थी
आज मंजिल वो उसकी उसके सामने थी,
इसलिये इस थकान मै भी, सुंकुं था
आँखों मै जो तृष्णा थी, वो समाप्त हो गाई थी
ओर वो अब थक कर चूर हो गाई थी
पर फिर भी अहसास था ख़ुशी का दिल मै
की मंजिल थी अब उसकी , उसके सामने....
पर आँखों मे एक अनोखी चमक थी
वो जिस मंजिल को पाने के लिए , वो दीन रात दोडा करती थी
आज मंजिल वो उसकी उसके सामने थी,
इसलिये इस थकान मै भी, सुंकुं था
आँखों मै जो तृष्णा थी, वो समाप्त हो गाई थी
ओर वो अब थक कर चूर हो गाई थी
पर फिर भी अहसास था ख़ुशी का दिल मै
की मंजिल थी अब उसकी , उसके सामने....
Monday, May 7
tofan se pehle
har tofan ke ane se pehle, kali raat kyu ati ha
hame nahi thakna ha ye hi batlati ha
or khti ha hame, a rahi tume chalte rehna ha
nahi to jiwan bekar or bemani ha...
hame nahi thakna ha ye hi batlati ha
or khti ha hame, a rahi tume chalte rehna ha
nahi to jiwan bekar or bemani ha...
चित्चोर
दोस्त पाने को तर्स्स्ती रही मै उमर भर
छानी दुनिया , दूंडी नगरी, घूमी मै दर बदर
पर वो चित्चोर छुपा बैठा था, मन के ही एक कोने मे
मै झूमी, नाची , गाई , उसे दिल के कोने मै खोज कर...
छानी दुनिया , दूंडी नगरी, घूमी मै दर बदर
पर वो चित्चोर छुपा बैठा था, मन के ही एक कोने मे
मै झूमी, नाची , गाई , उसे दिल के कोने मै खोज कर...
एक स्वपन
आकाश के सतरंगी इन्देर्धनुष मै खोजू मै प्रीये तुमको,
हर आवारा बदल ओर मदमस्त के संग छू लू मै प्रीये तुमको,
ये प्यास प्यारे से पपीहे की कोई, ओर ना पाये बुझा,
ओर कोई गाये आज इस रुत मै माल्हार, पर उस मल्हार के तरंगो मे
साज़ मै ओर हवा की सएँ सएँ मै,सुन लूं आज मै तुमको...
हर आवारा बदल ओर मदमस्त के संग छू लू मै प्रीये तुमको,
ये प्यास प्यारे से पपीहे की कोई, ओर ना पाये बुझा,
ओर कोई गाये आज इस रुत मै माल्हार, पर उस मल्हार के तरंगो मे
साज़ मै ओर हवा की सएँ सएँ मै,सुन लूं आज मै तुमको...
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