Sunday, November 29

मैं क्या yuhi गुमनाम marongi?

mujhe चमकता सितारा न बना, तो कोई गम नही खुदा
मगर mujhe उस आस्मां me, बस थोड़ी सी जगह देना
जिसकी मैं हकदार हूँ
तू जनता हा की मैं, अस्मा की बुलंदी पर जाने के लीया
कोई क़ुरबानी दूँगी नही,
तू jantaह, अपना hअक पाने के लिए लोगो से
मैं ladongi नही
मैं ऊपर पहुँचाने के लिए
किसी और को नही गिरओंगी कभी
बस कर्म कर रही हूँ, जी जान से
मन हो तुमारा तो मेरा ये जीवन सफल
बना देना,
कभी इस गुमनाम सी लड़की को
कोई तो इनाम दिला dena

Friday, November 27

मैं सब से लड़ चुकी पर कैसे भाग्य
से लडूं मैं अपने, वो मेरे भाग्य की काले साये
जो हो रहे ह नित और घने
वो जो अपनी जगह बनाने को
गिराना चाहते ह मुजको ऊपर से
वो क्यों हर बार परमपिता सफल हो जाते
ह,iradoon मैं अपने
पहले भी और अब भी वोही जलने वाले
रहो मै खड़े ह, जो मेरी विशेषताओ को
अपना दुश्मन मानते ह
मैं जानती हो मैं उन सब से ऊपर हूँ
पर तुम ही मोका दू मैं कैसे साबित करू?
और न साबित करो तो भी दुःख नही
पर उने ख़ुद को गिराने से कैसे
रोक मैं loo?

Tuesday, August 25

उठ भारत सवाप्न साकार कर अपना

ऐ अनमोल सृष्टि के रचियता, ऐ भारत
उठ सवाप्न साकार कर अपना
समानता, समता ममता की कर रचना
उठ भारत स्वप्न साकार कर अपना
विजयी भावः आर्शीवाद देते हा देवता
ले बापू का शास्त्र और ज्ञान ज्वर सा
प्राणों मै संचारित कर, लहू नव उल्लास का
ले अब शांत क्रांति कर दे आरम्भ नैनों मै
कर परिवर्तन का सपना
झूठ , पाप अनाचार का तिमिर मिटे
नव सदी हो निर्मित अब
सुन्दरता सावरतर हो, ऐसा कर गुजरना
प्रदीप्त हो जाए जग सारा
भविष्ये उज्जवल कर अपना
ऐ अनमोल सृष्टि..............
माना गया था तुझे उत्तम, अति उत्तम
कहीं अब ललकार न उठे
तू भी दिखा दे, तू ही उत्तम हा , रहेगा
सदा सर्वदा
ले नव शक्ति मत सह उलाहना,
प्रथम ज्ञान तुने दिया था
प्रकृति का पालना तू ही बना था
जाग जाग भारत पहचान बल अपना
ज्वाला तेरी आँखों मै हा
युग परिवर्तन का सपना
ऐ अनमोल ................

उठो जगा do

आशाओं के दीप जला लो
नन्हें बच्चो अपने नैनों में
फ़िर विश्वास की ज्योति जला दो
नन्हे बचो जग के सपनों मैं
चमन के फूल अलग जैसे
चमन के मूल अलग जैसे
क्यारियों मे, एक सा पानी फैला दो
सिंचन कर दो उन्माद रंगले उपवन में
है भाषा अलग ज्जैसे, हा बोली अलग जैसे
अलग अलग हैं विचार सबके
संस्किति की एकता दर्शा दो
भर दो विश्वास प्राण प्राण और जन जन में
आज सब टूट रहा हा
दिल भारतीये का बिखर रहा हा
कमजोर हा एकता, छा रही हा खान्द्ता,
तुम ही फ़िर से बिछुडे दिल मिला दो
कर दो संचार जाग्रति का तन मन मे
तिमिर मे बढता हा क्यों, नव निर्माण का कल्पतरु
नवनिर्माण होगा नहीं यु
ये तुम बतला दो
निष्प्राण मे प्राण जगा दो
आज तुम अपने श्रम से

Monday, July 27

ये कैसी नोबत आई?

ये कैसे नोबत आयी,
मुरझाने को कलि आयी,
झड़ गए वृक्षों के पत्ते,
काल ने जब हांक लगायी,
जहा बसता था प्रेम सदा,
आशियाना उजड़ गया,
बचा ह एक खँडहर ही बस,
प्रेम की एक एक ईंट हिल गयी.
टूट गया वो प्रेम् आज,
जो था भाई भाई मे कभी,
चीत्कार कर उठा परभात,
कैसे अँधेरी निशा ये आयी,
मील बर्बदियो ने जश्न मनाया,
हरएक जगह खून ह बहाया,
प्यार की जगह,चारों तरफ,
दुश्मनी ही दुश्मनी छायी.
बम्बों का अम्बार लगा,
सारा जहाँ ख़ून से लथपथ,
लाशो की सेज ह सजायी कीस्ने?
लाशो की सेज ह सजायी.
काल का देखो नग्न नाच,
कर गया विनाश आज, देख दशा
नव भारत की शवेता तेरी आंखे भर आयी.

आजादी के परवाने

वो आजादी के दीवाने थे,

दीवाने थे , परवाने थे।

वो जो कर्मठ, योगी और सयाने थे,

वो आजादी के दीवाने थे,

ओज वाणी से सारी वसुंधरा गर्जाते थे,

सवयम के पवित्र लहू से,

भारत माँ के चरण धुलाते थे,

अश्रू पूरित नैनों से, भारत को

गरिमाम्ये बताते थे,

सवर्ण चिरिया उड़ कर जो,

बंदिनी पिंजरे की बन गई,

वो पागल दीवाने उसे मात अपनी

बतलाते थे, उसके गुणगान गाते थे,

हाँ वो पागल और दीवाने थे,

आजादी........................................

सर्वोत्तम हो मेरा देश

तिमिर मिटा ह , आजादी के दीप जले ह
हर तरफ़ सुखमय हरियाली ह,
हरियाली के रंगों मॆं  ही
मेरी वसुंधरा हुई मतवाली ह,
झूम झूम के गाती धरती ह।
आओ सब मिल खेलें खेल
आज मिटा दे दुःख का अँधियारा,
ज्ञान का दिया जले हर घर मे एक,
सभी द्वेष अब मिट जायें और
खुशियों का हो समावेश,शवेता
की यही दुआ हा
सर्वोत्तम हो मेरा देश...