Saturday, June 9

ए रात क्यों/


raat tu kali andhiyari kyu ha
kyu tuzme me apna aks nahi dekh pati
ek jara si roshni hoti agar tuzme
to me bhi apne ap ko pehchan pati
tune apne andhiyare me samet li sari meri khushiya
agar bhor ka tu thora sa dars dikati to
tu usha kehlati, or fir me bhi gungunati
a raat , tu itni bhayanak kyu ha
kyu meri siskiyan tuzme or balwati ha ho jati
raat tu kali andhiyari kyu ha?

2 comments:

GIRISH BILLORE MUKUL said...

अंधेरों के लिए
रात को दोष मत दीजै
रातें सूरज की मज़बूरी के सिवा कुछ भी नहीं !!
######
ये अंधरे नहीं
सुकूँ के लिए मौका है
इस बेहतर दुनियां में दवा कुछ भी नहीं !!
######
जब भी होता है अँधेरा
तो दीप जगते हैं
मायने रोशनी के तब सभी समझते हैं !
ज़िंदगी *निशीथ के सिवा कुछ भी नहीं !!
######

GIRISH BILLORE MUKUL said...

अंधेरों के लिए
रात को दोष मत दीजै
रातें सूरज की मज़बूरी के सिवा कुछ भी नहीं !!
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ये अंधरे नहीं
सुकूँ के लिए मौका है
इस बेहतर दुनियां में दवा कुछ भी नहीं !!
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जब भी होता है अँधेरा
तो दीप जगते हैं
मायने रोशनी के तब सभी समझते हैं !
ज़िंदगी *निशीथ के सिवा कुछ भी नहीं !!
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