Wednesday, July 20

ham to bas chala karte ha

वोही  लोग  जो  पत्थर  मारा  करते  थे  कभी
वोही  लोग   हैं जो  अज   मुझे  तारीफों   के  पुलों  मैं  रखा  करते  ह

वोही  लोग  ह  जो  फर्शो  पे  भी  पाँव  न  रखने  देते
वोही  लोग  ह  जो  अर्शो  पे    बिठाये  फिरते  ह

 ये  तो एक दस्तूर  ह  ज़माने  का
जानते  ह  की  लोग  बस  चढ़ते   सूरज  को  सलाम  करते  ह

इन  लोगो  को  भी  तुम  कभी  न  समझोगे
ये  तो  बस  भीड़  मैं   कभी  भी  चल   देते  ह

जिस   दिन   जिधर  झुण्ड  चलता  ह

 बस  उधर  मुह  उठाये  तुरंत  चल  देते  ह

भीड़  मैं  तो   हर  कोई  चला  करता  ह  

हम  वो  मस्ताने  ह   जो  बस  अपनी  धुन  में  चला   करते  ह

3 comments:

anu said...

mastana wahi jo apni dhun naa chhode



accha likah hai

Arun said...

bahut sahi kaha bas chalate rahane ka nam jindagi h
http://aroonk2011.blogspot.com/

rajendra sharma'vivek" said...

rachanaakaar vahi hotaa hai jo apni rah svyam banaataa hai
bheed kaa ang nahi samaaj ko nayaa vichar deta hai