Sunday, August 21

जन जोश की आंधी बहती है

एक चिंगारी जो दबी हुई थी 
 आज भड़क फिर बैठी है ,
 अन्ना अब जुटे रहो 
 आज भारत की जनता ये  कहती ह
 जो तंग आ चुकी जंगल राज से 
   हक़  ले दो हमें ये कहती है
  न जाने अंत अब होगा क्या ?
 धर्मयुद्ध फिर है , आरम्भ हुआ ,
  अन्ना देखो जम के खड़ा ,
     उसके पीछे पीछे देखो
  जन जोश की आंधी बहती है
  अब  तो होके रहेगा विश्व का
  लोकतंत्र फिर से बहाल 
     क्युकी ये वो जनता ह
  जो हर दिन भ्रष्टाचार सहती है









6 comments:

ईं.प्रदीप कुमार साहनी said...

बहुत ही प्रेरक रचना | मैंने आपका ब्लॉग भी फोलो कर लिया है |

कृपया मेरी भी रचना देखें और ब्लॉग अच्छा लगे तो फोलो करें |
सुनो ऐ सरकार !!

और इस नए ब्लॉग पे भी आयें और फोलो करें |
काव्य का संसार

सम्पजन्य said...

" इंडिया अगेंस्ट करप्सन " के लोग बिल को बिना बहस के, बिना जाँच-परख के जल्दी से क्यों पास करवाना चाहते है ...जल्दी का राज क्या है .

shaveta said...

hain ye ha to sochne ki baat, par kisi par bhi andha vishwas karne wale bhartiye ha, ine koi kahin bhi haank le ine kya pata, binaq soche samjhe bas chal dete ha

shaveta said...

par ek bat to ha,bharshtachar se tang to ye aa chuke ha, ab ant kya ha pata nahi

Navin said...

I do no agree with "Sampajanya".

Team-anna had never said they wanted the bill to be passed without any discussion. What they have demanded was to place the bill on the floor of the parliament for debate. They knew that their bill would not passed by the parliament, because not even a single MP wanted that bill in that format. But by putting the bill in parliament, team-anna wanted to let the people of India know the stand of their representatives in 'Sansad'. And the ruling and opposition were aware of that fact. That is why they have not allowed the bill to be placed in the parliament as it was. Instead they sent the bill to standing-committee where the bill be 'tailored' suitably first and then will be sent to parliament.

Jay ho !

संतोष पाण्डेय said...

achhi, arthpoorn, vicharottejak, samsamyik kavita