Saturday, April 28

शेर

इश्क के गली से गुजरना,
ओर आग से गुजरना एक ,
ओर इस आग को पार करना,
ओर किसी को इकतरफा प्यार करना एक ..
इसलिये दील बस अब उनका इंतजार ओर ना कर
ना कर, बस बहुत हो चुका प्यार ओर ना कर...
बारीश...
बारिश की बूंदे गिरती जमी पार
सोंधी मिटटी की खुशबु फैलती कही पार
टप टप बूंदे गिरती सावन झूमता
मन मयूर मेरा भी इसमे झूमता

1 comment:

Goelji said...

wow those r real lovely poems.
can u tel me one thing?
tum hindi me typing kaise karti ho google me.