कागज पर ढल आई है मेरे अक्स की स्याही, कुछ और नहीं मैं बस एक रचना ही तो हूँ
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Sunday, April 15
एक ही रंग
होली के रंगो मे, मुज़े लगा ऐसा ह, कीत्ने रंग समेटे ह खुद मैं ,होली के मौका ह,
जब गुलाल उड़ता ह खुश चेहरों पर तो लगता ह, की सभी जो अलग अलग रंगो मैं खोये ह उस ,
हर रंग मे एक ही रंग ह जो दिखता ह, वो प्यार का रंग ह जो हर होली पे उड़ता ह.
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