Monday, March 30

मैं प्रतिबद्ध हूँ

मैं प्रंतिबध हूँ एक अछी शिक्षा देने के लिए
मै प्रतिबद्ध हूँ समाज को सही राह चलाने के लिए
मैं उन नियमो को नहीं मानती जो समाज के कुछ लोगो ने
बनाये अपनी ज्रुरुरत के लिए,केवल दिखावे के लिए,
कुछ ठेकेदार समाज के खुद ही उन नियमो को तोड़ते ,
जीन्हे वो लोगो का मार्गदर्शक कहते हैं,
मॆं प्रतिबद्ध हूँ समाज को सचाई से वाकिफ करने के लिए
मॆं प्रतिबद्ध हूँ जो कहती हूँ, कर दिखने के लिए.

1 comment:

Dr. Munish Raizada said...

श्वेता जी:
हिंदी में लिखिए, तो बहुत अच्छा लगेगा. आंगल भाषा में हिंदी कविता पढना दुष्कर कार्य है.